Home » देश » #विधानसभा चुनाव की आहट के बीच पंचायत चुनाव पर अदालत का सख्त रुख…सरकार के सामने संवैधानिक और सियासी चुनौती#

#विधानसभा चुनाव की आहट के बीच पंचायत चुनाव पर अदालत का सख्त रुख…सरकार के सामने संवैधानिक और सियासी चुनौती#

Share This Article

लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने लगी हैं, लेकिन पंचायत चुनाव के लिए अनिवार्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट तक सरकार प्रस्तुत नहीं कर सकी है। ऐसे में अदालत के आदेश ने सरकार की चुनावी तैयारियों और संवैधानिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बुधवार शाम चार बजे खुली अदालत में यह फैसला सुनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि नए पंचायत चुनाव संपन्न होने तक सभी निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। यह आदेश प्रयागराज निवासी इम्तियाज हुसैन और अन्य की ओर से समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर दिया गया।
विधानसभा चुनाव सिर पर, पंचायत चुनाव की तैयारी अधूरी!
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। ऐसे समय में हाईकोर्ट का तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश सरकार के सामने बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पंचायतों का कार्यकाल और चुनाव की संवैधानिक समय-सीमा पहले से निर्धारित है, तो सरकार ने चुनाव कराने की आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी क्यों नहीं कीं? विशेष रूप से पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का अब तक तैयार न होना चुनावी प्रक्रिया में बड़ी बाधा माना जा रहा है।
पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण निर्धारण के लिए आयोग की रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के बिना आरक्षण की प्रक्रिया को कानूनी चुनौती मिल सकती है। ऐसे में सरकार के सामने अदालत की समय-सीमा का पालन करने और आरक्षण संबंधी कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

सरकार फैसले को दे सकती है चुनौती
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार फिलहाल निर्धारित समय-सीमा में पंचायत चुनाव कराने की स्थिति में नहीं है। प्रशासनिक तैयारियों, पिछड़ा वर्ग आयोग की लंबित रिपोर्ट और अन्य कानूनी अड़चनों को देखते हुए सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रही है।
पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में भी अलग से सुनवाई चल रही है। सरकार पूर्व में चुनाव संबंधी अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है और कुछ स्थानों पर प्रशासक नियुक्त किए जाने की बात भी सामने आई है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह संभावना जताई जा रही है कि सरकार पहले विधानसभा चुनाव संपन्न कराने और उसके बाद पंचायत चुनाव कराने की रणनीति अपना सकती है। हालांकि, हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद ऐसी किसी भी रणनीति को कानूनी कसौटी पर परखा जाना होगा।
पंचायतों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी उठे सवाल
हाईकोर्ट के आदेश ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि निर्वाचित पंचायतों की जगह प्रशासकीय व्यवस्था आखिर कितने समय तक जारी रखी जा सकती है। संविधान के अनुच्छेद 243ई के तहत पंचायतों का कार्यकाल और चुनाव की समय-सीमा निर्धारित है। ऐसे में चुनाव में अनावश्यक देरी स्थानीय स्वशासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सरकार अदालत के आदेश के अनुरूप चुनावी तैयारियां तेज करेगी या फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल विधानसभा चुनाव की आहट के बीच पंचायत चुनाव पर आया यह आदेश प्रदेश की राजनीति में नया मुद्दा बन सकता है।
News 9 Bharat
Author: News 9 Bharat

News9Bharat.in एक निष्पक्ष, विश्वसनीय और तेज़ी से समाचार उपलब्ध कराने वाला हिंदी डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है। हमारा उद्देश्य देश और दुनिया की हर महत्वपूर्ण खबर को सरल, सटीक और तथ्यपरक रूप में पाठकों तक पहुँचाना है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Advertisement

Live Poll

Are You Satisfied News9bharat ?

Also Read This