भारतीय ज्ञान परंपरा से ही प्रशस्त होगा विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का मार्ग : मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर
योगाचार, शिक्षा, भारतीय कला एवं संस्कृति में नवाचार पर हुआ गहन विमर्श; 22 छात्र-दलों के नवाचार मॉडल हुए प्रस्तुत
छह स्टार्ट-अप्स को बीज-निधि एवं मार्गदर्शन सहयोग की घोषणा
वाराणसी, 16 सितंबर 2026।
‘नमो विकसित भारत संवाद’ के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडियन कल्चरल इनोवेशन्स कॉन्क्लेव-2026’ (ICIC-2026) का बुधवार को अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (AITM), वाराणसी के बुद्ध सभागार में भव्य समापन हुआ। ‘संस्कृति, ज्ञान, नवाचार, उद्यमिता, और भविष्य’ की मूल भावना के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, योग, कला, संस्कृति, उद्यमिता तथा तकनीकी नवाचार के विविध आयामों पर व्यापक विमर्श हुआ।

समापन समारोह की मुख्य-अतिथि पद्मश्री प्रो. मंगला कपूर ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का मार्ग भारतीय ज्ञान परंपरा से ही संभव है। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के पूर्व भारत की शिक्षा-पद्धति, ज्ञान-परंपरा और जीवन-पद्धति वैज्ञानिक, समावेशी तथा जीवन-केंद्रित थी। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में पुनर्परिभाषित और व्यवहार में रूपांतरित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने भारतीय संगीत और नाट्यशास्त्र की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय प्रदर्शन कलाओं, संगीत और रंगमंच की परंपरा ने विश्व की सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध किया है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि भारतीय संगीत और कलाओं में व्यक्ति के चिंतन एवं जीवन-दृष्टि को प्रभावित करने की गहरी क्षमता विद्यमान है।
समारोह में डॉ. गीता योगेश भट्ट, शताब्दी विजिटिंग फेलो, भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने ‘योगाचार में नवाचार’ विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्र-परंपरा में चेतना अथवा चित्त को सृजन का मूल स्रोत माना गया है और आधुनिक नवाचार को भी नई सोच एवं नई चेतना की संरचना से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने योग परंपरा के सूत्रीकरण तथा योगसूत्र की दार्शनिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए समकालीन जीवन में योग की वैश्विक स्वीकार्यता को रेखांकित किया।
डॉ. मोनिका मोहिनानी, चिकित्सा अधिकारी, चंदौली ने ‘गर्भ-संस्कार’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने भारतीय संस्कार परंपरा में गर्भाधान संस्कार के महत्व तथा स्वस्थ एवं संस्कारवान संतति की संकल्पना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक पक्षों को आज विश्व में वैज्ञानिक दृष्टि से पुनः समझने और स्वीकार करने के प्रयास हो रहे हैं तथा आवश्यकता है कि भारत अपनी ज्ञान-संपदा को आधुनिक संदर्भों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करे।
समारोह में डॉ. दिव्या सिंह, निदेशक, संत अतुलानंद रेजिडेंशियल अकादमी (SARA), वाराणसी ने ‘शिक्षा के नवाचार’ विषय पर विशेष संबोधन दिया। उन्होंने शिक्षा में नवीन पद्धतियों, रचनात्मकता तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण-अधिगम व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त सुप्रसिद्ध रंगमंच एवं सिनेमा निर्देशक श्री उमेश भाटिया ने ‘रंगमंच के नवाचार’ विषय पर संबोधित किया। श्री अजय कुमार सिंह, निदेशक, साई इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एवं साई रूरल टेक्नोलॉजी पार्क ने ग्रामीण विकास, प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के अंतर्संबंध पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में योग चिकित्सक श्री ओम प्रकाश सिंह ने योग-चिकित्सा विषय पर विशेष शोध-पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध-पत्र को ऑफलाइन श्रेणी में उत्कृष्ट शोध-पत्र पुरस्कार में प्रथम स्थान प्रदान किया गया, जबकि ऑनलाइन श्रेणी में श्री वरुण सिंह बिसेन को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत एवं विषय-प्रवर्तन डॉ. सारिका श्रीवास्तव, निदेशक, अशोका इंस्टीट्यूट ने किया। अशोका प्रबंधन की ओर से इ. अंकित मौर्य ने आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों का सम्मान अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर के किया।
आखिरी दिन बाइस छात्र-दलों नवाचार मॉडल हुए प्रस्तुत
ICIC-2026 के संपूर्ति समारोह में अशोका इंस्टीट्यूट के इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप फाउंडेशन द्वारा पिच एरिना में 22 परियोजनाओं एवं नवाचार मॉडलों का प्रदर्शन किया गया। विद्यार्थियों ने अपने विकसित मॉडल एवं परियोजनाएँ आमंत्रित उद्यमियों, निवेशकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत कीं।
इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा विकसित विभिन्न नवाचारों को व्यावहारिक उपयोगिता, तकनीकी दृष्टिकोण और उद्यमिता की संभावनाओं के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।
साथ ही, सुश्री साक्षी पटेल एवं श्री सुमीत पटेल को सर्वश्रेष्ठ व्यवसाय प्रदर्शनी पुरस्कार प्रदान किया गया।
स्टार्टअप पिच एरीना में उद्यमिता को मिला मंच
समापन समारोह के दूसरे सत्र में ‘बिजनेस इनोवेशन्स एंड पिच एरीना’ का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, नेतृत्व प्रशिक्षकों तथा युवा नवप्रवर्तकों ने भाग लिया।
इस सत्र में व्यापारी नेटवर्क की को-फाउन्डर डॉ. स्वाति ए. मित्तल, फाउन्डर श्री अपूर्व मित्तल, धन केपिटल वेंचर्स के फाउन्डर सीए धनंजय ओझा, श्री पुनीत मेहरोत्रा, श्री अभिजीत सिंह, सुश्री मोनिशा अग्रवाल, और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री वाईआई के सदस्य श्री उमंग झुनझुनवाला और शगुन झुनझुनवाला सहित अनेक विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
सात स्टार्ट-अप्स को बीज-निधि एवं मार्गदर्शन सहयोग
ICIC-2026 की प्रमुख उपलब्धियों में स्टार्टअप पिच एरीना में चयनित नवप्रवर्तक उद्यमों के लिए बीज-निधि एवं मार्गदर्शन सहयोग की घोषणा रही।
निम्नलिखित स्टार्टअप/उद्यमों को विभिन्न प्रकार का सहयोग प्रदान किए जाने की घोषणा की गई —
1. PowerSync (Vyapari Network) — बीज-निधि
2. SignBridge (CII–Yi) — बीज-निधि
3. Pralay Force + Aquora + Ace (DhanCapital Ventures) — बीज-निधि
4. A.G.E.S. — पूर्व-बीज निधि एवं मार्गदर्शन सहयोग
5. Techyra — मार्गदर्शन सहयोग
इस पहल के माध्यम से कॉन्क्लेव ने विद्यार्थियों और नवप्रवर्तकों को विचार से उद्यम तथा नवाचार से व्यावसायिक क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक मंच प्रदान किया।
भारतीय ज्ञान और आधुनिक नवाचार के समन्वय का संदेश
ICIC-2026 के तीनों दिवसों में भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन नवाचार, शिक्षा, कला, संस्कृति, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। आयोजन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक विरासत को केवल अतीत की धरोहर के रूप में देखने के बजाय उसे वर्तमान और भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक आवश्यकताओं से जोड़ने के लिए संवाद का मंच उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम का संचालन गौरव कुशवाहा व सज्जाद अली तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हसीबउद्दीन ने किया।
तीन दिवसीय ICIC-2026 की आयोजन की संयोजक डॉ. अपर्णा सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, उद्यमियों, विद्यार्थियों, कलाकारों, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
ICIC-2026 ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को नवाचार, उद्यमिता और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ते हुए संवाद, प्रस्तुति, शोध और उद्यम-निर्माण का एक साझा मंच उपलब्ध कराया।














