एक महीने में दो बार उजड़ा सराफा कारोबारी का परिवार, पत्नी के बाद मासूम बेटे की हत्या से टूटा घर
गोरखपुर। गोरखपुर के खजनी कस्बे के प्रतिष्ठित सराफा कारोबारी लक्ष्मी नारायण वर्मा के परिवार पर एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी त्रासदी टूट पड़ी है। पहले हनुमान वर्मा की पत्नी श्वेता का निधन हुआ और अब उनके मासूम बेटे वैभव की हत्या ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिस आंगन में कुछ दिन पहले बहू की चिता की राख ठंडी हुई थी, वहीं अब मासूम बेटे की अर्थी उठने से तीन पीढ़ियों का दर्द एक साथ छलक पड़ा। परिवार के मुखिया लक्ष्मी नारायण वर्मा और उनकी पत्नी द्रौपदी देवी के लिए यह सदमा असहनीय बन गया है। लक्ष्मी नारायण वर्मा के पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़े संयुक्त परिवार में हमेशा रौनक और चहल-पहल रहती थी, लेकिन अब पूरा घर मातम में डूबा हुआ है। हनुमान वर्मा और उनके छोटे भाई उमाशंकर खजनी में सराफा कारोबार संभालते हैं, जबकि एक भाई एम्स में चिकित्सक हैं और अन्य भाई भी व्यापार से जुड़े हैं। करीब एक महीने पहले हनुमान वर्मा की पत्नी श्वेता के निधन के बाद पूरा परिवार उनके तीनों बच्चों की देखभाल में जुटा था। सबसे छोटा होने के कारण वैभव दादा-दादी का सबसे दुलारा था। दादी द्रौपदी देवी उसे पलभर भी अपनी नजरों से दूर नहीं होने देती थीं, जबकि दादा लक्ष्मी नारायण अक्सर उसे अपने साथ दुकान तक ले जाते थे। पिता हनुमान भी बेटे की मासूम मुस्कान में पत्नी के बिछड़ने का दर्द भुलाने की कोशिश कर रहे थे। बताया जाता है कि वैभव की खिलखिलाहट पूरे संयुक्त परिवार की पहचान थी। वह स्कूल से लौटकर साइकिल चलाता, दोस्तों और भाइयों के साथ खेलता तथा दादा-दादी के साथ समय बिताता था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि रोज की तरह खेलने निकला यह मासूम फिर कभी घर वापस नहीं लौटेगा। सोमवार शाम से ही वैभव के लापता होने पर परिवार उसकी तलाश में जुट गया था। रातभर हर दस्तक और हर फोन कॉल से उम्मीद बंधती रही कि वह सकुशल मिल जाएगा, लेकिन मंगलवार को उसकी हत्या की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। दादा-दादी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। वहीं पिता हनुमान वर्मा के सामने एक महीने के भीतर पत्नी और बेटे दोनों को खोने का असहनीय दर्द खड़ा हो गया। खजनी कस्बे के लोगों का कहना है कि वर्मा परिवार वर्षों से अपने व्यापार और सामाजिक सरोकारों के लिए जाना जाता है। ऐसे सम्मानित परिवार पर लगातार दो बड़े दुखों ने पूरे कस्बे को शोक में डुबो दिया है। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ केवल एक मासूम को विदाई देने नहीं, बल्कि दुख की इस घड़ी में परिवार का संबल बनने पहुंची थी। अब घर में वैभव की किताबें, साइकिल और खिलौने तो हैं, लेकिन उन्हें संभालने वाली उसकी मासूम मुस्कान हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, खजनी कस्बे के सराफा कारोबारी का सबसे छोटा बेटा वैभव सोमवार दोपहर करीब दो बजे स्कूल से घर लौटा था। उसने स्कूल बैग रखा, यूनिफॉर्म बदली और नई साइकिल लेकर घर से निकल गया। कुछ देर बाद उसकी साइकिल लावारिस हालत में मिली, जबकि पास के खेत में उसकी एक चप्पल बरामद हुई। इसके बाद परिजन ने पुलिस को सूचना दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर वैभव के पीछे पड़ोस में रहने वाला कंप्यूटर शिक्षक सर्वेश भट्ट जाता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान पुलिस ने मंगलवार दोपहर सर्वेश के घर की तलाशी ली। इस दौरान उसके मकान के बेसमेंट से बालक का शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस हत्या के कारण और वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।














