राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में पैर पसार चुका ड्रग्स का अवैध कारोबार पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। दिल्ली पुलिस की जांच में गिरफ्तार ड्रग्स सिंडिकेट का कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय तस्करों और आतंकवादी संगठनों से सामने आया है।
इस नेटवर्क पर शिकंजा कसने और विदेशी तस्करों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए क्राइम ब्रांच एक विशेष एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार कर रही है।
दिल्ली बनी तस्करी का मुख्य ट्रांजिट हब
अपनी भौगोलिक स्थिति, बेहतरीन कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय राजमार्गों व रेलवे नेटवर्क से जुड़े होने के कारण दिल्ली तस्करी के लिए एक मुफीद डेस्टिनेशन बन गई है।
यह क्षेत्र ‘डेथ क्रेसेंट’ (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और ‘डेथ ट्राएंगल’ (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) जैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रूट्स से आने वाली खेप के भंडारण, पुनः पैकेजिंग और वितरण का मुख्य केंद्र है।
एंटी नारकोटिक्स सेल के डीसीपी गौरव गुप्ता का कहना है कि दो साल में विदेशी नागरिकों के खिलाफ कुल 277 केस दर्ज किए गए और इन मामलों में 312 को गिरफ्तार किए गए। इनके कब्जे से 537.4 किलो विभिन्न तरह के ड्रग्स बरामद किए गए हैं।
राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में पैर पसार चुका ड्रग्स का अवैध कारोबार पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। दिल्ली पुलिस की जांच में गिरफ्तार ड्रग्स सिंडिकेट का कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय तस्करों और आतंकवादी संगठनों से सामने आया है।
इस नेटवर्क पर शिकंजा कसने और विदेशी तस्करों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए क्राइम ब्रांच एक विशेष एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार कर रही है।
दिल्ली बनी तस्करी का मुख्य ट्रांजिट हब
अपनी भौगोलिक स्थिति, बेहतरीन कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय राजमार्गों व रेलवे नेटवर्क से जुड़े होने के कारण दिल्ली तस्करी के लिए एक मुफीद डेस्टिनेशन बन गई है।
यह क्षेत्र ‘डेथ क्रेसेंट’ (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और ‘डेथ ट्राएंगल’ (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) जैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रूट्स से आने वाली खेप के भंडारण, पुनः पैकेजिंग और वितरण का मुख्य केंद्र है।
एंटी नारकोटिक्स सेल के डीसीपी गौरव गुप्ता का कहना है कि दो साल में विदेशी नागरिकों के खिलाफ कुल 277 केस दर्ज किए गए और इन मामलों में 312 को गिरफ्तार किए गए। इनके कब्जे से 537.4 किलो विभिन्न तरह के ड्रग्स बरामद किए गए हैं।
यहां घनी आबादी और किराए के मकानों की बहुतायत के कारण पैडलर्स आसानी से पनाह ले लेते हैं। गुरुग्राम की पाॅश काॅलोनियों और हाई-राइज सोसाइटियों में किराए पर फ्लैट लेकर तस्कर अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है। पाश इलाकों में सुरक्षा जांच कम होने का फायदा उठाकर ये नेटवर्क चलाते हैं।
एयरपोर्ट के पास महिपालपुर और न्यू दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास पहाड़गंज के सस्ते होटलों और गेस्ट हाउसों का इस्तेमाल ट्रांजिट हब के रूप में किया जाता है। यहां विदेशी तस्कर आकर ठहरते हैं और कुछ ही दिनों में अपनी डिलीवरी देकर निकल जाते हैं।
ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे और नालेज पार्क के आसपास नाइजीरियाई नागरिक काफी सक्रिय रहते हैं। छात्र, टूरिस्ट व बिजनेस वीजा पर आने वाले अधिकतर नाइजीरियाई ड्रग्स तस्करी के अवैध नेटवर्क में शामिल पाए गए हैं।
नोएडा का नॉलेज पार्क इलाका भी नशे में डूबा
ग्रेटर नोएडा। विश्वविद्यालय और हाॅस्टल का हब कहे जाने वाला नालेज पार्क क्षेत्र नशे के रैकेट का गढ़ बनता जा रहा है। क्षेत्र में करीब 30 से 35 नामी विश्वविद्यालय और काॅलेज संचालित हैं। इनमें देश- विदेश के करीब चार लाख छात्र- छात्राएं पढ़ते हैं।
तस्कर काॅलेज, विश्वविद्यालय और प्राइवेट हास्टल में रहने वाले छात्रों को टारगेट करते हैं। ऑर्डर वाॅटसअप पर लिया जाता है। डिलीवरी सीधे हास्टल या पीजी के गेट तक पहुंचाई जाती है।
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पिछले सात महीनों में इस कोतवाली क्षेत्र से 120 किलो से ज्यादा गांजा, सिंथेटिक ड्रग्स और एमडीएमए बरामद हो चुका है। डग्स की तस्करी में नाइजीरियन महिला व पुरुष तस्कर धरे गए हैं।
पुलिस पूछताछ में इस बात का पर्दाफाश हुआ कि गिरोह में नशा करने वाले छात्रों को भी शामिल किया जाता है। उन्हीं के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न माध्यमों से मादक पदार्थों की सप्लाई की जाती है।
तस्कर भीड़ वाले रिहायशी इलाकों में महंगे किराए पर फ्लैट लेते हैं। ओमिक्राेन, नाॅलेज पार्क-दो, नाॅलेज पार्क-तीन, ऐच्छर, तुगलपुर और चाई-फाई के पास दर्जनों ऐसी इमारतें हैं, जहां 8 से 12 हजार रुपये में बिना पुलिस वेरिफिकेशन के सिंगल रूम एवं फ्लैट मिल जाता है।
मकान मालिक छात्र समझकर आडी लेकर दे देते हैं, बाद में वहीं से नेटवर्क चलता है। 80 प्रतिशत मकानों में किरायेदारों का सत्यापन नहीं होता इसका फायदा उठाकर तस्कर दो से तीन महीने में ठिकाना बदल लेते हैं।














