फूलपुर (आजमगढ़)। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ब्लाक और तहसील के चक्कर लगा रहे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। फूलपुर ब्लाक क्षेत्र में तैयार करीब 348 जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों से संबंधित जांच आख्या को लेकर ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लाक से तैयार कर तहसील भेजी गई आख्या रिपोर्ट को उपजिलाधिकारी कार्यालय में लेने में रोक लगाए जाने से प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए उपजिलाधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र देने के बाद संबंधित मामलों में खंड विकास अधिकारी से आख्या मांगी गई थी। इसके बाद ब्लाक स्तर पर जांच कर आख्या तैयार की गई और उसे डाक के माध्यम से तहसील मुख्यालय भेजा गया। वहां पहुंचने पर आख्या लेने पर रोक लगाए जाने की जानकारी दी गई। बताया गया कि ब्लाक में करीब 348 मामलों की जांच आख्या तैयार है। इनमें 24 सितंबर 2026 के बाद करीब 150 आवेदनों में वर्तमान उपजिलाधिकारी निकेत वर्मा ने ब्लाक से आख्या मांगी थी, जबकि 178 मामलों में पूर्व उपजिलाधिकारी द्वारा आख्या मांगी गई थी। प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि 30 सितंबर से वे लगातार ब्लाक और तहसील के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। आवेदकों के अनुसार ब्लाक से तहसील भेजा जाता है, जबकि तहसील स्तर पर अलग-अलग प्रक्रिया बताए जाने से उन्हें परेशानी हो रही है। प्रभारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत फूलपुर अरुण कुमार यादव ने बताया कि शासन या जिला स्तर से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक संबंधी कोई निर्देश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदक चंद्रकला पत्नी संतोष निवासी कनेरी, जरीना पत्नी इरफान निवासी गनडी, शशांक पुत्र मनोज भारती निवासी फूलपुर देहात, अशोक पुत्र जियालाल निवासी कनेरी, मो. वकास पुत्र अतीकुर्रहमान निवासी मीर अहमदपुर और शहजादा आदि ने बताया कि कई दिनों से ब्लाक और तहसील के चक्कर लगाने के बावजूद प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र कई सरकारी और व्यक्तिगत कार्यों के लिए आवश्यक हैं। इस संबंध में उपजिलाधिकारी फूलपुर निकेत वर्मा ने बताया कि एक से दो वर्ष तक की अवधि के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। 348 मामलों की जांच आख्या के संबंध में उन्होंने बताया कि खंड विकास अधिकारी और अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत को पत्र भेजकर एक-दो वर्ष की जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद नियमानुसार प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।














